हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले चर्चाओं पर विराम लगाते हुए, स्टार पहलवान विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया शुक्रवार को कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये दोनों दोपहर करीब 2:30 बजे दिल्ली में एआईसीसी मुख्यालय में कांग्रेस का हिस्सा बन सकते हैं। इस खबर के बाद, कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों आगामी हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार हो सकते हैं। हरियाणा में विधानसभा चुनाव अगले महीने होने हैं।
4 सितंबर को, दोनों पहलवानों ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल से नई दिल्ली में मुलाकात की थी। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर राहुल गांधी, विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया की एक तस्वीर साझा की थी। पुनिया और फोगाट 2023 में भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन प्रमुख और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन में प्रमुख चेहरों में से एक थे।

विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया के चुनाव लड़ने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, फोगाट हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, पुनिया इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे लेकिन कांग्रेस में शामिल हो जाएंगे। फोगाट के एक करीबी रिश्तेदार ने पहले ही पुष्टि कर दी थी कि वह हरियाणा से चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने कहा, “हां, विनेश हरियाणा में चुनाव लड़ेंगी। कहां से? यह पार्टी तय करेगी। पहले वह तैयार नहीं थीं, लेकिन समाज और हरियाणा के विकास के लिए उन्होंने यह निर्णय लिया है। उन्होंने इन वर्षों में बहुत कुछ सहा है। उम्मीद है कि लोग उनका समर्थन करेंगे।”
विनेश ने पेरिस ओलंपिक में 50 किलोग्राम के गोल्ड मेडल मुकाबले में वजन 100 ग्राम ज्यादा होने के कारण पदक से चूक गई थीं। इसके बाद उन्होंने 8 अगस्त को कुश्ती से संन्यास की घोषणा की। इसके बाद से ही अटकलें लगाई जा रही थीं कि वह सक्रिय राजनीति में शामिल होंगी, ठीक वैसे ही जैसे उनकी चचेरी बहन बबीता फोगाट, जो भाजपा की विधायक हैं।
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 31 अगस्त को मतदान की तारीख को 1 अक्टूबर से बदलकर 5 अक्टूबर कर दिया है, और जम्मू-कश्मीर और हरियाणा दोनों के लिए मतगणना की तारीख को 4 अक्टूबर से 8 अक्टूबर कर दिया है। यह फैसला बिश्नोई समुदाय की परंपराओं और उनके आस्था उत्सव ‘आसोज अमावस्या’ के चलते लिया गया है, जिसमें वे अपने गुरु जम्भेश्वर की स्मृति में यह दिन मनाते हैं।